संदेश

चित्र
खूंखार बम एक्सपर्ट टूंडा जैसे कितने गद्दार? मोस्ट वांटेड खूंखार आतंकवादी बम बनाने का एक्सपर्ट अब्दुल करीम उर्फ टूंटा आखिर पकड़ा गया। यह वह हैवान है जिसने देश के कई हिस्सों में आतंकवाद के बीज रोपे। आतंक की पैदाईस में इसका बहुत बड़ा हाथ रहा है। हैरत यह कि रेड कॉर्नर नोटिस के बाद भी यह पहली बार गिरफ्त में आया। पत्रकारिता के सफर में अब्दुल करीम उर्फ टूंडा पर मुझे कई बार लिखने का मौका मिला। हिन्दुस्तान में ही जन्मे इस नापाक गद्दार के इरादे शुरू से ही खतरनाक रहे थे। खून-खराबा, हिंसा उसे पसंद थी। बम बनाते वक्त हुए एक विस्फोट में इसका हाथ उड़ गया तभी नाम टूंडा पड़ा। भारत में सीरियल बम धमाकों के बाद यह बंगलादेश के रास्ते पाकिस्तान भाग गया था। कोई दोराय नहीं कि यदि हिन्दुस्तान में ऐसे हैवान न हो तो पाकिस्तान की औकात इतनी नहीं कि वह हम पर चोट कर सके। कभी चिकित्सक रहे टूंटा का शुरू से ही देश को आतंकवाद की आग में झोंकने का मकसद रहा। चार भाषाओं पर उसकी पकड़ है। गिरफ्तारी के वक्त भी इस आतंकी की नजरों का अंदाज बेहद शातिराना था। 70 साल की उम्र में भी यह भारत की तबाही का ख्वाब देख रहा था। इस शात...
चित्र
माफ करना दामिनी! हम भी गुनाहगार हैं! दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली की बस में रूह कंपा देने वाली दरिंदगी का शिकार हुई दामिनी आखिर इस दुनिया से रूखसत हो गई। वह भी तक जब वह जीना चाहती थी। उसने लिखकर कहा था-‘माँ मैं जीना चाहती हूं।’ दुःख व गुस्से का गुबार हर भारतीय के दिल में है। पूरी घटना कोढ़ग्रस्त इंसानियत की ऐसी नंगी हकीकत है, जो हमेशा शर्मसार करती रहेगी। कड़वी हकीकत है कि लड़कियां महफूज नहीं हैं और लोग बेटियां पैदा करने से भी डरते हैं। आबादी के लिहाज से दुनिया में दूसरे नंबर वाले भारत में हालात ज्यादा शर्मनाक हैं। ऐसी घटनाओं पर अरब के सख्त कानून की जरूरत याद आती है। दुनिया में सबसे कम अपराध वहीं होते हैं।  इस हकीकत का स्वीकार कर लेना चाहिए कि ऐसे लोगों को कानून का खौफ नहीं है?  छेड़छाड़ के मामलों में तो देश के अधिकांश हिस्सों में हालात एक जैसे हैं। इस पीड़ा को नजदीक से महसूस करना है, तो उन कामकाजी महिलाओं व लड़कियों से बात करिये जो प्रतिदिन सफर से लेकर कार्यालय तक में मानसिक यंत्रणा सहती हैं। कुंठित मानसिकता वाले उजले चेहरे वाले भी इस मामले में पी...
चित्र
मौत पर खत्म नेताओं से रिश्तों का सफर महत्वाकांक्षी लड़कियों को दौलत शोहरत का नशा -समाज में भरे हुए हैं कई गोपाल कांडा   रसूखदार नेता व उद्योगपति गोपाल कांडा को लेकर अपनी सांसों की डोर तोड़ने वाली गीतिका शर्मा की मौत ने उन चेहरों को बेपर्दा किया है जो उजले रहते हैं। इसके साथ ही फिजा, शहला मसूद, भंवरी देवी, मधुमिता, कविता चौधरी, शिवानी भटनागर व नैना साहनी जैसे बहुचर्चित कई मामले ताजा हो गए हैं। ख्वाहिशें लड़कियों को जिस जन्नत में ले जाती हैं, वहां वापसी के दरवाजे नहीं होते। तेजी से उड़ान भरने के सपने कभी-कभी खूनी हो जाते हैं। ऐसे विकास की कीमत चुकानी पड़ती है। सभी में खूबसूरत युवतियों का नेताओं से रिश्तों का सफर मौत की दहलीज पर जाकर खत्म हुआ आखिर क्यों? यह चकाचौंध भरे बदलते समाज की हकीकत है। दरअसल कुछ युवतियां भी थोड़े वक्त में वह सब पा लेना चाहती हैं जिसके लिये मेहनत वालियां सालों तरसती रहती है। उनकी जल्द प्रगति राज रहती है। शायद मतलब निकलते तक। बाद में उनकी कहानी भयानक अंजाम के रूप में सामने आती है। रंगीनमिजाज नेता पैसे का जाल फेंकते हैं जिसमें जाल फंस जाता है। अति महत्वाक...
चित्र
ऑनर किलिंग एक खूनी सिलसिला -अपने ही करते हैं अपनों का कत्ल -इज्जत की खातिर होता  खूनी खेल क्या कोई पिता अपनी ही बेटी के सिर को काटकर धड़ से अलग कर सकता है, क्या कोई भाई अपनी बहन को गोली से उड़ा सकता है? क्या कोई माँ बेटी के खून से हाथ रंग सकती है? क्या लोग किसी को सरेआम फांसी पर लटका सकते हैं? यह सवाल तुगलकी है, लेकिन इस दिल दहला देने वाली हकीकत का आइना अक्सर देखने को मिल रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश ओर हरियाणा में पुलिस के रोजनामचे में सैंकड़ों कत्ल ऐसे दर्ज हैं जिनकी मौत के परवानों पर अपनों ने ही दस्तख्त कर दिये। प्रेमी युगलों के नसीब में मौत दर्ज करने वाले अपने ही होते हैं। प्रेम करना गुनाह है क्योंकि पुरातन मान्यताएं, संस्कार ओर परंपराएं इसकी इजाजत नहीं देती। समाज के ठेकेदार कबिलाई अंदाज में कानून को ठेंगा दिखाकर चौंकाने वाले फैंसले देते हैं। खूनी खेल खेलते वक्त उन्हें कानून का डर नहीं सताता। प्रेमी युगलों की हत्याएं यूं तो समाज में कथित इज्जत को बचाने की खातिर की जाती हैं, लेकिन क्या कत्ल कर देने से इज्जत बच जाती है? इस सवाल का जवाब कई वर्षों की पत्रकारिता में मैं खुद भी नहीं...
चित्र
रेल हादसा, कौन है आखिर मौतों का जिम्मेदार? -जांच, मुआवजा और राजनीति का तमाशा कब तक। तूफानी गति से दौड़ती कालका एस्सप्रेस कानपुर के नजदीक अचानक लगे ब्रेक से पटरी से उतर गई। डब्बे क्षतिग्रस्त हो गए। इसके साथ ही मची चीख-पुकार ने पत्थर दिलों को भी दहला दिया। डब्बों से निकलती खून से लथपथ लाशों में तब्दील हुए यात्रियों और मौत को बेहद करीब से देखने वाले घायलों ने सोचा भी नहीं था कि उनका सफर इस कदर खौफनाक होगा। कई घरों के चिराग बेवक्त हमेशा के लिये बुझ गए। सरकार ने मरहम के तौर पर मुआवजे की घोषणा करके मौतों की कीमत लगा दी। कुछ इस तरह कि ‘हम सबक नहीं लेंगे। गलती तो हुई है, लेकिन कीमत भी तो दे रहे हैं।’ जिनके घरों के चिराग बुझ गए उनके दर्द की दवा पैसा नहीं। जांच की बात भी हो गई। जाहिर है जांच, मुआवजा और राजनीति का जमकर तमाशा होगा। जांच के नतीजे रसूखदारों के इशारों पर नाचकर हमेशा की तरह फाइलों में दफन हो जायेंगे। लाशों की कीमत लगाने की मानसिकता में हादसों से सबक लेने का काम किया भी नहीं जाता। अफसोसजनक ही सही, लेकिन इस परंपरा को इस कदर ईमानदारी से निभाया जाता है कि किसी एक हादसे के जख्म भरते नहीं ओर...
चित्र
इज्जत की खातिर सजा-ए-मौत सलाखों के पीछे पुलिस गिरफ्त में बैठे उस नौजवान के चेहरे पर चिंता की लकीरों का नाम-ओ-निशान नहीं था। बल्कि अपने किये पर जैसे उसे गर्व महसूस हो रहा था। उसने किसी ओर को नहीं बल्कि अपनी जवान बहन की बेरहमी से गला काटकर हत्या कर दी थी। बहन की मौत के परवाने पर दस्तख्त उसने समाज में अपने परिवार की इज्जत बचाने की खातिर किये, लेकिन क्या वाकई उसकी इज्जत बची? इसका जवाब खुद उसके पास भी नहीं था। मामला उत्तर प्रदेश का है। पुलिस क लिये उस सुबह का आगाज अच्छा नहीं रहा। एक युवक दौड़ता हुआ थाने आया। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे लगे हुए थे। उसके दाएं हाथ में तेजधार वाला छुरा था जिस पर खून लगा हुआ था। युवक ने बताया कि उसने बदनामी की वजह बनी अपनी बहन का कत्ल कर दिया है। पुलिस ने मृतका का खून से लथपथ शव बरामद किया। पूछताछ में चौंकाने वाली बात सामने आयी। दरअसल 19 वर्षीया शाइस्ता को मोहब्बत का तराना गुनगुनाना मौत की चौखट पर ले गया था। वह बी.ए. प्रथम वर्ष की पढ़ायी कर रही थी। इसी दौरान एक युवक से वह प्यार करने लगी थी। कातिल भाई इमरान को अपने किये का जरा भी पछतावा नहीं था। बकौल इमरान-‘शाइस्ता...
चित्र
पत्नी के टुकड़े करने वाला ये इंसान तो नहीं है.... -इंजीनियर बना सबसे बड़े क्रूरतम कत्ल का वारिस -बेखौफ कहता है वह‘मार दिया,तो अब सजा दो’ -खूब चटक रही है पति-पत्नी के रिश्तों की बुनियाद उस शख्स की उम्र 37 साल है। दिल्ली यूनिवर्सिटी का टॉपर है ओर पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर। बातचीत का अंदाज भी रईसी और पढ़े-लिखों वाला है, लेकिन दिल्ली से अमेरिका की नामी कंपनी,कलकत्ता व देहरादून तक का सफर कर चुके इस शख्स के दामन पर अपनी प्रेमिका से पत्नी बनी अनुपमा गुलाटी के खून के इतने दाग लगे हैं जिन्हें कानून के आर्यभट्ट भी नहीं मिटा सकते। हैवानियत व दरिंदगी की हर हद को उसने लांघा। किसी ने सोचा भी नहीं था कि पढ़ाई के बल पर ऊँचें ओहदे पर पहुंचा राजेश गुलाटी देश के सबसे बड़े क्रूरतम व सनसनीखेज मर्डर का वारिस बन जायेगा और इस बहस का पुख्ता सुबूत भी कि पति-पत्नी के रिश्ते की बुनियाद आधुनिकता की चकाचौंध में किस कदर चटक रही है। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक ज्योति स्वरूप पांडे, आईजी राम सिंह मीना व एम.ए.गणपति तक हैरान हैं कि वह कभी इतने भयानक हत्याकांड से रू-ब-रू नहीं हुए। राजेश ने न सिर्फ अपनी पत्नी का कत्ल किया...