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देशभक्त जवानों पर गंदी राजनीति न कीजिए! वतन की हिम्मत सैनिकों से है, राजनीति से नहीं -नितिन सबरंगी विवादित बयानबाजी में कुख्यात हो चुके यूपी के ताकतवर मंत्री आजम खां ने कहा कि करगिल का युद्व मुस्लिम सैनिकों ने लड़ा.....कुर्बानी देने वाले मुस्लिम थे...ओर भी बहुत कुछ। कहना पड़ेगा कि राजनीति वाकई हद दर्जे तक गिर गई है। इसीलिए अलोकतांत्रिक, मूर्खतापूर्ण ओर शर्मनाक बयान आया। आजम साहब को कौन समझाये कि सरहदों की हिफाजत करने वाले राजनीति से आजाद होते हैं। उनकी सोच घिनौनी ओर अपाहिज नहीं होती, कोई लालच भी नहीं होता। फर्ज के प्रति ईमानदारी उन की सबसे बड़ी दौलत होती है। सवाल यह है कि ऐसा कहकर सैनिकों को क्यों राजनीति में ला रहे हैं। कुर्बानियों पर सियायत क्यों कर रहे हैं? जनाब एक वही तो है जिनकी बदौलत हम महफूज सोते हैं। आप जैसे नेताओं के हाथ सरहदें नहीं दी जा सकती, क्या भरोसा सरहदों का भी सौदा कर दें क्योंकि राजनीति अब फर्ज नहीं सिर्फ मुनाफा देखती है। वैसे जनाब करगिल युद्व किसी हिन्दू-मुसलमान ने नहीं बल्कि भारत के सच्चे देशभक्त जवानों ने जीता था, भारतीयों ने जीता था, हिन्दुस्तानियों ने ...
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मौत पर खत्म नेताओं से रिश्तों का सफर महत्वाकांक्षी लड़कियों को दौलत शोहरत का नशा -समाज में भरे हुए हैं कई गोपाल कांडा   रसूखदार नेता व उद्योगपति गोपाल कांडा को लेकर अपनी सांसों की डोर तोड़ने वाली गीतिका शर्मा की मौत ने उन चेहरों को बेपर्दा किया है जो उजले रहते हैं। इसके साथ ही फिजा, शहला मसूद, भंवरी देवी, मधुमिता, कविता चौधरी, शिवानी भटनागर व नैना साहनी जैसे बहुचर्चित कई मामले ताजा हो गए हैं। ख्वाहिशें लड़कियों को जिस जन्नत में ले जाती हैं, वहां वापसी के दरवाजे नहीं होते। तेजी से उड़ान भरने के सपने कभी-कभी खूनी हो जाते हैं। ऐसे विकास की कीमत चुकानी पड़ती है। सभी में खूबसूरत युवतियों का नेताओं से रिश्तों का सफर मौत की दहलीज पर जाकर खत्म हुआ आखिर क्यों? यह चकाचौंध भरे बदलते समाज की हकीकत है। दरअसल कुछ युवतियां भी थोड़े वक्त में वह सब पा लेना चाहती हैं जिसके लिये मेहनत वालियां सालों तरसती रहती है। उनकी जल्द प्रगति राज रहती है। शायद मतलब निकलते तक। बाद में उनकी कहानी भयानक अंजाम के रूप में सामने आती है। रंगीनमिजाज नेता पैसे का जाल फेंकते हैं जिसमें जाल फंस जाता है। अति महत्वाक...