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जल्लाद भी खुश हो गया आतंकी  कसाब की फांसी से *आतंकी पर अब तक 36 करोड़ खर्च हुए, *राक्षस को जिंदा रहने का मिलेगा सालों मौका, *1 अरब से ज्यादा हो सकता है दुष्ट पर खर्चा, *जल्लाद बोला सरेआम होनी चाहिए फांसी 166 बेगुनाह लोगों की मौत व 350 को घायल करने का षडयंत्रकारी आरोपी खूंखार आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को फांसी होने से केवल वही लोग खुश नहीं है जिन्हें उसने कभी न भरने वाले जख्म दिये हैं बल्कि उसे फांसी देने के इंतजार में बैठा देश का इकलौता जल्लाद भी खुश है। उसकी दिली ख्वाहिश है कि वह जालिम दहशतगर्द को बहुत जल्द फांसी पर लटकाकर कुछ सेकेण्ड में ही उसकी सांसों की डोर को तोड़ दे, लेकिन अफसोस! भारत में ऐसी व्यवस्था आतंकवादियों के लिये नहीं है। देश के 70 फीसदी से भी ज्यादा लोग पाकिस्तानी राक्षस या यूं कहंे आतंकवाद की हांडी के सड़े हुए ‘एक चावल’ कसाब को नाम व शक्ल से जानते हैं। इसे विशेष अदालज के माननीय न्यायाधीश एम.एल. तहलियानी देश को आर्थिक चोट हमले से भी मिली ओर कसाब से भी। क्योंकि इस कसाब पर अब तक सरकार के 36 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं। उसे सुविधाओं के बीच जिंदा रखना मजबूरी जरूर है...
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बंदूक वाले मास्टर जी उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में नरभक्षी गुलदारों, तेंदूओं ओर बाघों का आतंक कोई नई बात नहीं है। बच्चों व बड़ों को वह अपना शिकार बनाते रहते हैं। लखपत सिंह रावत पेशे से शिक्षक थे। उन्हें सपनों में भी बच्चों की चीखें सुनायी देती थीं। वर्ष 2000 में उत्तराखंड का चमोली जिला नरभक्षी गुलदार से आतंकित हुआ, तो बड़े-बड़े शिकारी आये, लेकिन नरभक्षी इतना चालाक हो गया कि दो साल तक वह मारा नहीं जा सका। वह 12 बच्चों का अपना निवाला बना चुका था। तब लखपत सिंह ने सरकार से जिद करके नरभक्षी को मारने का परमिट लेकर कलम थामने वाले हाथ में बंदूक ली और उसे मार गिराया। इस शिक्षक ने मौत से सामना करने के लिये बंदूक थामी तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक यह शिक्षक उत्तराखंड के चमोली, टिहरी, पौड़ी, चंपावत, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी व देहरादून आदि जिलों में दर्जनों नरभक्षियों को मार चुका है। उन्होंने नरभक्षियों पर शोध भी किया। उनके असामान्य व्यवहार के कारणों को जाना ओर लोगों को बचाव के उपाय भी बताये। लखपत सिंह को आज लोग बंदूक वाले मास्टर के नाम से जानते हैं। (पूर्ण कहानी मनोहर कहानियाँ के अप्रैल...
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खाप पंचायत ने पति-पत्नी को भी बना दिया भाई-बहन दुनिया की तमाम हलचल से बेखबर दस महीने का मासूम रौनक गहरी नींद के आगोश में था। इसके विपरीत कविता के मन में तूपफान उठ रहा था। एक ऐसा तूफान जो शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। वह ऐसे भंवर में उलझी हुई थी जिससे वह निकलना चाहती थी। यह भंवर था वक्त और उसकी जिंदगी। सुहागन होकर भी वह खुद को विधवा महसूस कर रही थी। उसके दिल-ओ-दिमाग पर शादी से लेकर खाप पंचायत के फैसले की यादें रह-रहकर ताजा हो रहीं थीं। नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी। कभी वह रौनक को देखती तो कभी शून्य को निहारने लगती। यह सिलसिला घंटों चलता रहा। वह खुद को दुनिया की सबसे बदनसीब विवाहिता समझ रही थी। सामाजिक व्यवस्था, पुरातन मान्यता व गोत्रा विवाद ने उसे ऐसा झटका दिया कि जिस पति के साथ वह ढाई साल से सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रही थी उसी पति के साथ उसका रिश्ता भाई-बहन का बना दिया गया। जो सतीश कल तक रौनक का पिता था वह मामा बन गया। पंचायत का फरमान भले ही तुगलकी ओर दिलों को कभी न भरने वाले जख्म देने वाला था, लेकिन सामाजिक बहिष्कार के डर से उसे मानना सभी की मजबूरी थी। कविता के पति को भी सजा...
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बाबा इच्छाधारी देह का व्यापारी शिवमूर्त द्विवेदी खुद को साईं भक्त बताता था। उसने अपना नाम रखा था इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूट वाले। उसके सैंकड़ों भक्त थे, लेकिन साईं भक्ति व भगवा चोले की आड़ में वह देश का सबसे बड़ा सैक्स रैकेट चला रहा था। इच्छाधारी इस बाबा का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। उसके रैकेट में 500 से ज्यादा स्कूली छात्राओं, मॉडल्स, छोटे पर्दे की कलाकारों, एयर होस्टेस से लेकर घरेलू महिलाएं तक थीं। र्ध्म की आड़ में वह करोड़ों की सम्पत्ति का वारिस बन गया। दूसरों को धर्म व नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाला खुद अनैतिकता में लिप्त था। कई नेताओं, पुलिस अधिकारियों व करोड़पतियों से उसके संबंध रहे। इच्छाधारी की जब पोल खुली तो दिल्ली पुलिस के अलावा उसके भक्त भी चौंक गए। वह आपराधिक पृष्ठभूमि का भी स्वामी था। (सम्पूर्ण कहानी मनोहर कहानियाँ के अप्रैल,2010 अंक में) कुछ हिस्सा... शॉम ढलने के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली की रंगीनियां भी बढ़ जाती हैं। शॉपिंग माल्स, होटलों व सड़कों पर लंबी चमचमाती कारों का कापिफला भी सड़कों के सीने पर दौड़ता हुआ नजर आने लगता है। एक करोड़ की आबादी वाली रा...
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सानिया +शोएब: सरहदों ओर सवालों में उलझा रिश्ता सानिया मिर्जा व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक का गुपचुप ढंग से पनपा रिश्ता किसी मुकाम पर पहुंचने से पहले ही सवालों ओर विवादों के चक्रव्यूह में उलझ चुका है। दोनों ही चर्चित हैं ओर कई कारणों से विवादित भी रह चुकेे हैं। सरहदों ने भी इस रिश्ते को उलझन में डाल दिया है। दो देशों के झुलसते रिश्तों के बीच मोहब्बत का तराना गुनगुनाने का दावा करने वाले सानिया-शोएब पर तिरछी नजरें हैं। क्योंकि इसकी गुंजाइश कम है कि इससे मुल्कों के रिश्तों में तल्खी फनां होकर मिठास पैदा होगी या पुराने जख्मों के निशां मिट जायेंगे, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री नवाज व पाक रेंजर डीजी मो. याकूब इसकी उम्मीद जता रहे हैं। निकाह के बाद सानिया दुबई में बसने की घोषणा कर चुकी है। हैदराबाद की ही शोएब की पूर्व कथित पत्नी आयसा सिद्दीकी इस वक्त सबसे बड़ी खलनायक बनकर उभरी हैं ओर लगातार गंभीर आरोप लगा रही हैं। शोएब के खिलाफ बंजारा हिल्स थाने में धारा-240,498 व 206 के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करा दिया गया है जिनमें गिरफ्तारी संभव है। बेटी को इंसाफ दिलाने के लिये एम.ए. मलिक भी मैदान में हैं। शोए...
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इश्क के जुनून में खानम का खून -नितिन सबरंगी जरायम को लेकर भी बदनाम हो रहे उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में प्रतिदिन की भांति उस दिन भी लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। बस अड्डों पर आमतौर पर मुसाफिरों की भीड़ जमा रहती है। सोहराब गेट बस अड्डे पर भी दोपहर के वक्त सैंकड़ों मुसाफिर मौजूद थे। खुर्जा-बुलन्दशहर को जाने वाली रोडवेज बस आकर खड़ी हो गई। इस बस का नंबर था यूपी 15 एटी-1593। बस के रूकते ही एक-एक कर उसमें दर्जनों लोग सवार हो गए। खूबसूरत दिखने वाली एक दुबली-पतली युवती भी बस की तरफ बढ़ी। युवती नीले रंग की जींस ओर छींटदार कुर्ता पहने हुए थी। यह लिबास उस पर खूब फब रहा था। एक तो खूबसूरती दूसरे उसका लिबास ये दोनों ही चीजे ऐसी थीं जो यात्रियों का ध्यान उसकी तरफ खींच रहीं थीं। युवती के कंधे पर पर्स झूल रहा था। वह युवती अकेली नहीं थी उसके साथ अधेड़ महिला भी थी। पहली ही नजर में देखकर लग रहा था कि दोनों के बीच कोई बेहद नजदीकी रिश्ता था। बस तैयार खड़ी थी। वह दोनों भी उसी बस में सवार हो गईं। उनके चढ़ते ही परिचालक ने सरसरी सी नजरें डालकर पूछा,‘‘कहां जाना है आपको?’’‘‘भैया बस गुलावठी तो जायेगी ना?’’ युवती के ...
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इंतकाम की आग -नितिन सबरंगी (बिजनौर यूपी का बहुचर्चित कांड) दुनिया की तमाम हलचल से बेखबर पूरा गांव नींद के आगोश में था। रात्रि का दूसरा पहर शुरू हो चुका था। वक्त तो नींद का ही था, लेकिन 17 साल की फातिमा व उसके पिता अख्तर की आँखों से नींद कोसों दूर थी। दोनों के ही मनों में तूफान सा उठ रहा था। एक ऐसा तूपफान जो शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। उसके दिल-ओ-दिमाग पर पंचायत और उसके फैसले की यादें रह-रहकर ताजा हो रहीं थीं। अपमान व तिरस्कार ने उन्हें झकझोर दिया था। करवटेें बदल-बदलकर दोनों को कब नींद आ गई इसका पता उन्हें भी नहीं चल सका। फातिमा ने जो कुछ भी देखा था वह दिल को दहला देने वाला था। वह अपने पिता के कमरे में सो रही थी। तभी उनका पड़ोसी राशिद व उसका बड़ा भाई हसीनुद्दीन दबे पांव वहां आ गये। कुछ आवाज सुनकर उसकी आंख खुली तो देखा तो उनके हाथों में खून से सनी कटार चमचमा रही थी और वह खा जाने वाली नजरों से उसे घूर रहे थे। फातिमा की निगाह जमीन पर पड़ी तो हलक से चीख निकल गई। खून से लथपथ उसका पिता अख्तर जमीन पर पड़ी किसी मछली की तरह तड़प रहा था। फातिमा से यह सब देखा नहीं गया वह फुर्ती से खड़ी हुई और उसन...