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रविवार, जनवरी 24, 2010

**हदों को लांघता अंधविश्वास <("_")>

इंसान भले ही चाँद पर क्यों न पहुच गया हो लेकिन समाज मे न तो तंत्र मन्त्र का ढोंग करने वालों की कमी है और न ही अंध विश्वास करने वालो की. सहारनपुर मे एक काली बिल्ली का खोफ कुछ एस तरह फे़ला की लोगों ने बंगाल से हजारों खर्च करके तांत्रिकों की एक टीम बुलवा ली. उन्होंने लोगो का जमकर पागल बनाया. आफत और अफवाओ ने पुलिस के भी होश उडा दिए. अंधविश्वास का आलम यह था की लोगों ने दारुल उलूम के मुफ्ती आरिफ कासमी व सहर काजी की अपील को भी नहीं माना. ढोंगी तांत्रिकों ने कई बकरों व मुर्गों की भी बलि दे डाली. उन्होंने एक लड़की को जबरन मुर्गे का खून कटोरे मे डालकर पीने पर मजबूर किया. काली बिल्ली के साये से बचने को लोगों ने महंगाई के इस दोंर मे १० कुंतल सरसों सड़कों पर बिखरवा दी. आखिर पुलिस नींद से जागी और मुकदमा दर्ज करने के साथ ही बंगाली बाबावों की तलाश मे दबिसे दी तो वह भाग गए. अब काली बिल्ली का साया भी नहीं है. ये घटना सबूत ही एस बात का की हमारे देश मे अंधविश्वास की जड़ें किस हद तक मोजूद है. काली बिल्ली से साये को भगाने मे लोगों ने जीतना रुपया ढोंगी बाबावो पर खर्च क्या उतने मे उनके इलाके का विकाश हो सकता था. गरीबों को कई दीनों का भरपेट भोज़न मील सकता था. मेरा इससे जुडा आर्टिकल "सरस सलिल" नवम्बर,०९ के अंक में.*******
**संसद मे भी नींद जरूरी....शर्मनाक.....

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद जहा जनता के चुने हुए नेता अपनी आवाज़ बुलंद करते है. अपने इतिहाश मे कई शर्मनाक पलों को समेटे हुए है. फिर भी हमारे नेता हरकतों से बाज़ नहीं आते. आज लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पर संसद मे जमकर बहस हुई. बहस तेज आवाज़ मे हुई, कई बार सांसदों को शांत किया गया. ये तो मामूली बात हुई. इस सब शोर के बीच एक सांसद आराम की नींद सोते रहे. पता नहीं नेताजी ने जनता के लिये कितनी महनत की होगी की थककर जनाब को नींद ही आ गई. ये नेताजी बहस कर रहे कांग्रेस के जगदम्बिका पाल के ठीक पीछे थे. फोटो उनकी हकीकत बयां कर रहा है. जाहिर है उनके इलाके की जनता को अपने नेता की ये नींद पसंद नहीं आयगी.**

शुक्रवार, जनवरी 22, 2010

बयान+महंगाई+आम जनता के आंसू = शरद पंवार
केंद्रीय खाद व् उपभोक्ता मामलों में मंत्री शरद पंवार पता नहीं क्या कहते है? या तो वह अनजाने में बयान देते है या फिर उनकी वजह से दलालों और बिचोलियों को बड़ा फायदा हो रहा है. उनके बयान का बाजार पर तुरंत क्या फर्क पड़ता है और आम आदमी किस तरह से अपनी किस्मत और सरकार को कोसकर पिसता है शायद इसका उन्हें अंदाजा भी न हो. बेचारी आम जनता की बात को छोड़ भी दीया जाये तो उनके अपने ही उनके बयानों से खुश नहीं है. वह राज्यों की सरकारों और गेर दलों के निशाने पर है. उनकी वजह से पार्टी के गुब्बारे की हवा निकल रही है. महंगाई को रोकने में नाकाम सरकार अपनी विफलता को छिपा रही है. कभी शरद पंवार कहते है कि खाद पदार्तों की कीमत बढ सकती है, कभी कहते है कि दूध कि कीमत बढ सकती है. चीनी के दामों पर कहते है कि *मै कोई ज्योतीस नहीं जो बता सकू कि चीनी के दाम कब कम होंगे* एक वरिष्ट मंत्री ही यदि इस तरह का बयान दे तो क्या कहा जा सकता है. वेसे कमर तोड़ महंगाई सरकार पर तगड़ी बिजली बनकर गिरेगी. वेरोधी दल भी इसको मुद्दा बनायंगे. सरकारी आंकड़े ही खुद सरकार को चिड़ा रहे है. फिलहाल तो जरूरत महंगाई व् शरद पंवार के बयानों पर लगाम लगाने की है. हर तरफ से घिरने के बाद शरद पंवार सारा दोस मीडिया के सिर पर मढ़ देते है की उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया जाता है.

मंगलवार, जनवरी 05, 2010


अब आए ऊंट पहाड़ के नीचे..........
पुरानी कहावत सामने आ रही है. दो ऊंट या सम्मानजनक सब्दों में अपनी दुनिया के बेताज नहीं "ताज वाले बादशाह" रुचिका कांड के आरोपी राठोर और लाखो लोगों की आस्था का किला बने संत आशाराम बापू गिरफ़्तारी से बचने के लिये घूम रहे है. मोह माया से लगाव न रखने वाले करोरों के स्वामी आशाराम बापू को एक मामले में अग्रिम जमानत देने से कोर्ट ने इंकार कर दीया है. उनकी गिरफ़्तारी का रास्ता बिलकुल साफ़ है. बाबा भगवान की सरन में है. इसी तरह वर्दी वाले गुंडे रुचिका कांड के आरोपी राठोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर अब उनकी गिरफ़्तारी भी हो सकती है. उम्मीद है जनाब को अब कोर्ट के बाहर हंसी नहीं आयगी. देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री में आरुषी के पिता तलवार उनकी पत्नी नुपुर तलवार एक बार फिर सी. बी. आई के निशाने पर है. आरुषी कांड यकीनन देश का अनोखा बड़ा केश है जीसने अपराध के बड़े बड़े जानकारों के दीमाग को हिलाकर रख दिया है. वह साजिश का इतना बड़ा सरताज है जो लाखों दीमाग से आगे की सोच रखता है. उसका रसूख भी है, दो़लत के बल पर वह किसी से भी जमीर को खरीदने की ताकत रखता है. अरुषी के खून का कारण भी कई राजों का राजदार है. सीबीआई अब फिर जाच करेगी. सवाल यही है क्या कोई साजिश का सरताज बेनकाब होगा? अब देखते है क्या होता है.