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शुक्रवार, मार्च 12, 2010

खूंखार आतंकी को मारने वाली रूखसाना-
लड़कियां ऐसी भी होती हैं
-नितिन सबरंगी
भारत पाकिस्तान के बार्डर से सटे प्राकृतिक सौन्दर्य की गोद में सिमटे राज्य जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद से रिश्ता सालों पुराना है। आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों ने इस प्रदेश के वास्तविक चेहरे को बिगाड़ने का काम किया। भारत के सिरमौर इस स्वर्ग की सरजमीं पर दनदनाने वाले सैंकड़ों आतंकवादी सालभर में मारे जाते हैं उनके नापाक मंसूबे नाकायमयाब होते है और उनसे लाखों रूपये के विदेशी हथियार भी बरामद होते हैं। जाहिर है यह सुखद पहलू है, लेकिन दुखद पहलू यह भी है कि आतंकवादियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई में भारत माँ के लाल भी शहीद हो जाते हैं। कश्मीर के आवाम का तो दहशत व खौफ से चोली-दामन का साथ है। उनके दिल-ओ-दिमाग पर हर वक्त एक अंजाना सा खौफ तारी रहता है। आतंकवादियों की बंदूके कब किसके सीने को छलनी कर दें इस बात को कोई नहीं जानता। कड़वी हकीकत यह है कि आये दिन होने वाली घटनाओं की जनता व पुलिस दोनों ही आदि हो चुके हैं। सितम्बर के महीने में हल्की ठंडक के साथ ही मौसम गुलाबी सा हो चला था। 28 सितम्बर,2009 की सुबह राजौरी जिले के समूचे पुलिस महकमे से लेकर प्रदेश पुलिस के मुखिया कुलदीप खोड़ा तक चौंक गए थे। आतंकवादी घटनाओं से रू-ब-रू होना तो अध्किारियों के लिये कोई नई बात नहीं थी, लेकिन यदि कुछ नया था तो यह थी वह सूचना जो सुबह से कई मर्तबा वायरलैस सेट पर गूंज गई थी। वायरलैस पर शाहदरा चौकी प्रभारी असलम मलिक की आवाज गूंजी थी,‘‘कंट्रोल रूम मैसेज नोट कीजिएगा हमारे इलाके में एक आतंकवादी मारा गया है। वह अपने साथियों के साथ एक घर में घुस गया था आतंकवादी को एक लड़की ने मारा है...आतंकियों की दो ए.के.-47 रायपफले भी छीन ली गई हैं ओवर।’’ कंट्रोल रूम में तैनात ड्यूटी ऑपफीसर को मैसेज सुनते ही पहली मर्तबा झटका लगा। आतंकी को एक लड़की ने मारा है यह बात बिल्कुल अटपटी थी। संदेश पर संदेह हुआ तो पुष्टि के लिये उसने पूछा,‘‘चौकी शाहदरा दोबारा रीपीट करें आतंकवादी को किसने मारा है?’’‘‘एक लड़की ने। अभी हम पफोर्स के साथ मौके पर जा रहे हैं ओवर।’’ कुछ ही पलों में कंट्रोल रूम से यह सूचना आला अध्किारियों को प्रसारित कर दी गई। सूचना ने सभी को चौंका दिया था, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों के सैंकड़ों गांव ऐसे थे जहां मौत का डर दिखाकर आतंकवादी पनाह लेते आये थे। पुलिस व सेना की तमाम कोशिशों के बाद भी वह घुसपैठ करते थे। लोग बेबस थे यदि कभी किसी ने आतंकियों को विरोध् भी किया, तो आंतकी दिल दहला देने वाली घटनाओं को अंजाम दे बैठते थे। लोगों के सिरों पर मौत मंडराती थी। ऐसे हालातों में एक लड़की ने आतंकवादी को मार दिया था जम्मू-कश्मीर के इतिहास में यह पहली घटना थी। ऐसा साहस पहले कभी किसी ने नहीं दिखाया था।घटना कैसे हुई थी? मारा गया आतंकवादी कौन था? उसके कितने साथी थे? उनके आने का मकसद क्या था? ऐसे तमाम सवाल थे जिनका जवाब तत्काल किसी के पास नहीं था। घटना चूंकि.......(मनोहर कहानियाँ के जनवरी,2010 अंक में प्रकाशित) पूर्ण स्टोी के लिये मेल करें-nitinsabrangi@gmail.com

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