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गुरुवार, अगस्त 03, 2017

चोटीकटवा, मंकी मैन और मुंहनुचवा.....
-नितिन शर्मा ‘सबरंगी’

देश के चार राज्यों में एक अफवाह चोटीकटवा ने आतंक की तरह काम किया। महिलाओं व लड़कियों के चोटी कटने के मामले तेजी से सामने आये। यह चोटी काटता कौन है? यह रहस्य है, लेकिन इसने सभी के होश उड़ा दिए। अफवाह ने खतरनाक रूप लिया और उन्माद फैलने लगा। आगरा में लोगों ने एक महिला को डायन बताकर लाठी डंडों से पीटकर मार डाला। यह समाज को कलंकित करती घटना है। दरअसल शहरी व देहात इलाकों में महिलाओं व लड़कियों की चोटी काटने के मामले प्रकाश में आये। कटी चोटियां हाथ में होती हैं इसलिए घटनाओं को पूरी तरह झुठलाया भी नहीं जा सकता। चोटी कटने के पीछे तरह-तरह के दावे और अफवाहें हैं। हैरत भरे किस्से रहस्य से परिपूर्ण और रोमांचक जरूर हैं। वैज्ञानिक इसे अंधविश्वास और मनोविज्ञानी बीमारी बताते हैं। असामाजिक तत्वों की करतूत भी इसे बताया जा रहा है। पुलिस कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। इससे पहले वर्ष 2001 में मंकीमैन ने खूब दहशरत फैलाई। इसके बाद मुंहनोचवा आ गया। हैरानी की बात यह है कि किसी का भी कभी ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया। समय के साथ ऐसी घटनाएं और किस्से थम जाते हैं। अफवाहें कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन जाती हैं। चोटीकटवा से जादू टोना व तंत्रमंत्र करने वालों की दुकानें जरूर आबाद हो गई हैं। ऐसी घटनाओं की जड़े तलाशकर उन्माद न फैले इसके उपाय करने होंगे, क्योंकि अफवाहें तबाही का काम करती हैं।