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शनिवार, अक्तूबर 03, 2015

अंजानों पर न करें विश्वास
-नितिन शर्मा ‘सबरंगी’
दिल्ली में रह रहे ग्राफिक डिजाइनर अभिजीत व उसकी चित्रकार दोस्त आर्ट टीचर मोमिता समुंद्र तल से 6730 फुट की ऊंचाई पर बसे उत्तराखंड के प्रमुख लोकप्रिय पर्यटन स्थल चकराता घूमने गए। वहां उनकी मुलाकात एक टैक्सी चालक से हुई। दोनों उस पर विश्वास करके वह ऐसी भूल कर बैठे जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। आर्थिक रूप से सम्पन्न दास दंपत्ति की 28 वर्षीय बेटी मोमिता केरियर बनाने के लिये दिल्ली गई। वहां उसकी दोस्ती चित्रकार अभिजील पॉल से हो गई। दोनों के शौक एक जैसे थे। लिहाजा उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। मोमिता को प्राकृतिक सौन्दर्य से प्यार था। वह फोटोग्राफी के लिए घूमा करती थी। एक सुबह उसने पिता को फोन करके बताया,

‘‘पापा मैं आज उत्तराखंड के चकराता जा रही हू।’’

‘‘क्यों?’’
‘‘बस घूमने ओर अच्छे फोटोग्राफ के लिये।’’
‘‘अकेली जाओगी?’’
‘‘नहीं पापा मेरे साथ अभिजीत है।’’ एक दिन बाद सब परेशान हो गए जब मोमिता का फोन नहीं मिला। उन्होंने उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी। दिल्ली पुलिस टीम उत्तराखंड गई। उत्तराखंड पुलिस ने जांच की। मोमिता के मोबाइल की अंतिम लोकेशन चकराता पायी गई। मोमिता ने एक स्थानीय नंबर पर भी अंतिम बार बात की थीं। डीआईजी संजय गुंज्याल के निर्देशन में पुलिस ने उस नंबर की जांच करायी जिस पर मोमिता की बात हुई थीं। वह नंबर एक टैक्सी चालक राजू का निकला। उससे सख्ती से पूछताछ हुई, तो उसने जो राज खोला वह शर्मसार करने वाला था। बुरी लतों का शिकार व शॉर्टकट से अमीर बनने का सपना देखने वाले राजू ने 3 दोस्तों के साथ दोनों की हत्या कर दी थी। 
टैक्सी में अभिजीत व मोमिता की बातचीत, पहनावा देखकर उसने अंदाजा लगाया कि दोनों ही अमीर हैं। उसने उन्हें लूटने की ठान ली। दोनों कला प्रेमी थे। चालाकियों से उनका वास्ता नहीं था इसलिए भरोसा कर लिया। तीनों ने मोमिता के साथ छेड़छाड़ की, विरोध पर जीप में पड़ी रस्सी निकालकर पहले अभिजीत का गला दबाया फिर मोमिता की भी दुपट्टे से गला दबाकर हत्या कर दी। मरने से पहले मोमिता बहुत गिड़गिड़ाई, लेकिन किसी को भी उस पर दया नहीं आयी। उनका सामान लूटकर दोनों के शव अलग-अलग फेंक दिए गए। विवेचनाधिकारी ठाकुर सिंह रावत ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। मोमिता व अभिजीत ने राजू पर अधिक विश्वास न किया होता, तो वह आज जिंदा होते।

1 टिप्पणी:

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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