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रविवार, अक्तूबर 18, 2015

इंद्राणी एक खूबसूरत शातिर औरत
-नितिन शर्मा ‘सबरंगी’
अर्श से फर्श पर गिरकर कैसी तड़प होती है? इस हकीकत को सलाखों के पीछे अपने ही बुने जाल में फंसी इंद्राणी से बेहतर शायद ही कोई दूसरा बता पाए। जेल की जिंदगी उसे कांटे की तरह चुभ रही है और वह बाहर निकलने के लिए छटपटा रही है। इंद्राणी मुखर्जी कभी गुवाहटी की एक मामूली लड़की हुआ करती थी। वह आधुनिकता की अंधी दौड़ में शरीक होने का ख्वाब देखती थी। ऐसे ही ख्वाब ने उसे अति महत्वाकांक्षी बना दिया। उसने नारी सीमाओं को ताक पर रखा ओर रिश्तों के अजीब जाल में उलझती चली गई। उसकी किस्मत के सितारे बुलन्दी पर पहुंचे, तो एक दिन इंद्राणी मीडिया जगत की नामी हस्ती बन चुकी थी। दौलत उसके कदम चूमती थी ओर वह दुनिया की 50 पावरफुल महिलाओ की सूची में शामिल थी। शोहरत व दौलत के शिखर पहुंचकर संतुलन बनाए रखना हर किसी के वश में नहीं होता। इंद्राणी पर भी दौलत व शोहरत का ऐसा नशा हावी हुआ कि वह सुधुबुध खो बैठी। उसने एक बड़ा गुनाह करके राज को ही दफन कर दिया, लेकिन राजदार रहा शख्स उसका ड्राइवर श्यामराय हथियार तस्करी मामले में पुलिस पकड़ा गया, तो उसने ऐ
सा राजफाश किया जिसने पूरे देश में तहलका मचा दिया। मुंबई की खार पुलिस ने इंद्राणी को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल उजले चेहरे वाली इन्द्राणी ने अपनी 22 साल की खूबसूरत बेटी शीना का कत्ल कर उसे बेहद शतिराना अंदाज में दफना दिया था। उसने मां-बेटी के खूबसूरत रिश्ते का भयानक अंत कर दिया था। मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने केस को चुनौती की तरह लिया। जेल में बंद इंद्राणी ने अपने गुनाह से न केवल नारी की छवि पर ही सवाल खड़े कर दिए बल्कि सनसनीखेज दास्तान का काला पन्ना भी बन गई। सलाखों की जिंदगी अब उसे बोझिल लगी रही है। यकीनन कभी उसने ऐसा सोचा होता, तो ऐसी नौबत नहीं आती।

शनिवार, अक्तूबर 03, 2015

अफशां एक खतरनाक औरत
-नितिन शर्मा ‘सबरंगी’ 
नामः अफशां जबीन उर्फ निकी जोसेफए उम्ररू 37 साल।
गुनाहः आतंकी संगठन में भर्ती के लिए युवकों को उकसाना। 
अंजामः जेल की सलाखों के पीछे। जी हा! फोटो में दिख रही इस महिला का प्रोफाईल कुछ ऐसा ही है। आइएस की पहली भारतीय एजेंट खतरनाक इरादों की वारिस अफशां फेसबुक के जरिए नौजवान युवकों को फंसाने का जाल बिछाती थी ओर उन्हें सीरिया ओर इराक में जड़े जमा चुके खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ;आइएसद्ध के लिए जिहादी बनाकर भर्ती कराती थी। वह न सिर्फ ऑनला
इन भर्ती कर रही थी बल्कि आइएस के खूंखार इरादों ओर कारनामों का प्रचार भी करती थी। झूठे ढंग से खुद को ब्रिटिश नागरिक बताने वाली अफशां हैदराबाद की रहने वाली थी। उसने इंटर आबूधाबी से किया ओर पुनः इंडिया आ गई। बाकी पढ़ायी कर वह यूएई चली गई। दुबई भी उसका ठिकाना था। अफशां खुफिया एजेंसियों के रडार पर तब आयी जब आतंकी संगठन के लिए काम करने वाले अमेरिका से आए एक इंजीनियर सलमान को हैदराबाद एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उसने ही अफशां के कारनामें बताये। उसे संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार किया गया। इन्वेस्टीगेशन एजेंसीज की पूछताछ के बाद यह महिला सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की तौबा कर रही है।
अंजानों पर न करें विश्वास
-नितिन शर्मा ‘सबरंगी’
दिल्ली में रह रहे ग्राफिक डिजाइनर अभिजीत व उसकी चित्रकार दोस्त आर्ट टीचर मोमिता समुंद्र तल से 6730 फुट की ऊंचाई पर बसे उत्तराखंड के प्रमुख लोकप्रिय पर्यटन स्थल चकराता घूमने गए। वहां उनकी मुलाकात एक टैक्सी चालक से हुई। दोनों उस पर विश्वास करके वह ऐसी भूल कर बैठे जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। आर्थिक रूप से सम्पन्न दास दंपत्ति की 28 वर्षीय बेटी मोमिता केरियर बनाने के लिये दिल्ली गई। वहां उसकी दोस्ती चित्रकार अभिजील पॉल से हो गई। दोनों के शौक एक जैसे थे। लिहाजा उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। मोमिता को प्राकृतिक सौन्दर्य से प्यार था। वह फोटोग्राफी के लिए घूमा करती थी। एक सुबह उसने पिता को फोन करके बताया,

‘‘पापा मैं आज उत्तराखंड के चकराता जा रही हू।’’

‘‘क्यों?’’
‘‘बस घूमने ओर अच्छे फोटोग्राफ के लिये।’’
‘‘अकेली जाओगी?’’
‘‘नहीं पापा मेरे साथ अभिजीत है।’’ एक दिन बाद सब परेशान हो गए जब मोमिता का फोन नहीं मिला। उन्होंने उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी। दिल्ली पुलिस टीम उत्तराखंड गई। उत्तराखंड पुलिस ने जांच की। मोमिता के मोबाइल की अंतिम लोकेशन चकराता पायी गई। मोमिता ने एक स्थानीय नंबर पर भी अंतिम बार बात की थीं। डीआईजी संजय गुंज्याल के निर्देशन में पुलिस ने उस नंबर की जांच करायी जिस पर मोमिता की बात हुई थीं। वह नंबर एक टैक्सी चालक राजू का निकला। उससे सख्ती से पूछताछ हुई, तो उसने जो राज खोला वह शर्मसार करने वाला था। बुरी लतों का शिकार व शॉर्टकट से अमीर बनने का सपना देखने वाले राजू ने 3 दोस्तों के साथ दोनों की हत्या कर दी थी। 
टैक्सी में अभिजीत व मोमिता की बातचीत, पहनावा देखकर उसने अंदाजा लगाया कि दोनों ही अमीर हैं। उसने उन्हें लूटने की ठान ली। दोनों कला प्रेमी थे। चालाकियों से उनका वास्ता नहीं था इसलिए भरोसा कर लिया। तीनों ने मोमिता के साथ छेड़छाड़ की, विरोध पर जीप में पड़ी रस्सी निकालकर पहले अभिजीत का गला दबाया फिर मोमिता की भी दुपट्टे से गला दबाकर हत्या कर दी। मरने से पहले मोमिता बहुत गिड़गिड़ाई, लेकिन किसी को भी उस पर दया नहीं आयी। उनका सामान लूटकर दोनों के शव अलग-अलग फेंक दिए गए। विवेचनाधिकारी ठाकुर सिंह रावत ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। मोमिता व अभिजीत ने राजू पर अधिक विश्वास न किया होता, तो वह आज जिंदा होते।