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शुक्रवार, मई 22, 2015

शबनम तुम्हें फांसी जरूरी है!
-नितिन शर्मा ‘सबरंगी’
‘शबनम ओर उसके प्रेमी सलीम के हक में मौत की सजा मुकर्रर की जाती है। इन दोनों को तब तक फांसी पर लटकाया जाये जब तक इनकी मौत न हो जाए’ कुछ इसी तरह न्यायाधीश ने एक डबल एमए युवती शबनम और उसके प्रेमी के हक में फांसी की सजा पर मुहर लगा दी। दरअसल शबनम उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद के समीपवर्ती जनपद अमरोहा के बामनहेड़ी गांव की रहने वाली थी। वह नजदीक ही रहने वाले एक लड़के समीम से प्रेम करती थी। शबनम के पिता पेशे से शिक्षक थे। उन्होंने अपने
बच्चों को भी ऐसी ही तालीम दी। नतीजन दो बेटे इंजीनियर बन गए जबकि शबनम डबल एमए करके शिक्षा मित्र बन गई। शबनम अपनी मर्जी से निकाह करना चाहती थी और पिता की पूरी प्रापॅर्टी पर अपना हक भी। परिवार के जिंदा रहते यह मुमकिन नहीं लिहाजा वर्ष 2005 में एक रात उसने व उसके प्रेमी ने कुल्हाड़ी से गले काटकर अध्यापक पिता, माँ, इंजीनियर भाई, दूसरे भाई, भाभी, मासूम भतीजे व एक रिश्तेदार लड़की का कत्ल किया। पूरे परिवार में सिर्फ शबनम ही जिंदा बची थी। अपने समय का यह सामूहिक नरसंहार बेहद चर्चित कांड रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती को भी मौके पर आना पड़ा। पुलिस को कत्ल की कोई मकूल वजह नहीं मिली, तो शक शबनम पर ठहर गया। कवरेज के दौरान मुझे आज भी याद है शबनम का वह चेहरा जब वह रोने की नौटंकिया करके वह इंसाफ की गुहार कर रही थी कि सर! इंसाफ दिला दो। बहरहाल शबनम और उसका प्रेमी गिरफ्त में आ गए। ऐसा कोई शक या कमजोर सबूत नहीं कि कातिल दोनों नहीं थे लिहाजा एक साल बाद दोनों को फांसी की सजा सुना दी गई। लेकिन वह हाईकोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा। अब अमरोहा जिला जज अशोक कुमार ने क्रिमिनल याचिका अपीलें निरस्त करके दोनों का डेथ वारंट जारी किया है। शबनम को देखकर नहीं लगता कि कोई लड़की अपनों के लिए इस कदर क्रूर भी हो सकती है। शबनम जेल में रहते प्रेमी के बच्चे की माँ भी बनी। उसके बेटे की परवरिश जेल में ही हो रही है। बेटियों पर गर्व के बीच ऐसी बेटी पर भला कोई कैसे गर्व करे। शबनम वाकई फांसी की हकदार है ताकि फिर कोई ऐसा न कर सके। 

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