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बुधवार, अप्रैल 09, 2014

देशभक्त जवानों पर गंदी राजनीति न कीजिए!
वतन की हिम्मत सैनिकों से है, राजनीति से नहीं
-नितिन सबरंगी
विवादित बयानबाजी में कुख्यात हो चुके यूपी के ताकतवर मंत्री आजम खां ने कहा कि करगिल का युद्व मुस्लिम सैनिकों ने लड़ा.....कुर्बानी देने वाले मुस्लिम थे...ओर भी बहुत कुछ। कहना पड़ेगा कि राजनीति वाकई हद दर्जे तक गिर गई है। इसीलिए अलोकतांत्रिक, मूर्खतापूर्ण ओर शर्मनाक बयान आया। आजम साहब को कौन
समझाये कि सरहदों की हिफाजत करने वाले राजनीति से आजाद होते हैं। उनकी सोच घिनौनी ओर अपाहिज नहीं होती, कोई लालच भी नहीं होता। फर्ज के प्रति ईमानदारी उन
की सबसे बड़ी दौलत होती है। सवाल यह है कि ऐसा कहकर सैनिकों को क्यों राजनीति में ला रहे हैं। कुर्बानियों पर सियायत क्यों कर रहे हैं? जनाब एक वही तो है जिनकी बदौलत हम महफूज सोते हैं। आप जैसे नेताओं के हाथ सरहदें नहीं दी जा सकती, क्या भरोसा सरहदों का भी सौदा कर दें क्योंकि राजनीति अब फर्ज नहीं सिर्फ मुनाफा देखती है। वैसे जनाब करगिल युद्व किसी हिन्दू-मुसलमान ने नहीं बल्कि भारत के सच्चे देशभक्त जवानों ने जीता था, भारतीयों ने जीता था, हिन्दुस्तानियों ने जीता था ओर हमें उन पर नाज है। हमेशा रहेगा भी। जवानों को जाति-धर्म में न बांटिये वहां सिर्फ देशभक्त चलता है। जातिवाद, भाई-भतीजावाद के लिये, तो राजनीति ही काफी है। वैसे सभी जानते हैं कि चुनावी सभा का बयान चंद मुस्लिम वोटों को लुभाने के लिये था।