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मंगलवार, नवंबर 30, 2010

बलात्कारी तांत्रिक करोड़ों का वारिस
-नाबालिग से लेकर महिलाएं तक होती थीं शिकार,  
-अंधभक्तों से कमायी करोड़ों की दौलत
-अय्याशी के बाद अबॉर्शन कराने जाता था अस्पताल
उजली सीरत वाले 45 साल के उस शख्स को अंधविश्वास में डूबे उसके हजारों भक्त बंगाली बाबा उर्फ नदीम खादिम उर्फ मेहंदी हसन व जावेद आदि नामों से जानते थे। भक्तों की उसके यहां कतारें लगती थीं। यह शख्स इंसान के रूप में हैवानियत की हदों को लांघता था कुछ इस तरह कि इंसानियत भी शर्मसार हो जाये। उसकी गंदी नजरे लड़कियों व रईस घरों की औरतों के जिस्मों को भेदती थीं। तंत्र-मंत्र की आड़ मंे वह अय्याशी का घिनौना खेल खेलता था। मजबूरियों का फायदा उठाकर वह मौत और बर्बादी का खौफ दिखाता था। लड़कियां उसके लिये महज मनोरंजन का साधन थीं। यूं तो इस पापी ने आधा दर्जन से ज्यादा बेगुनाह लड़कियों को नापाक किया, लेकिन बेगैरती की इंतहा देखिए। इस पाखंडी ने अड़चनें दूर करने व तालीम देने के बहाने से एक परिवार को अपने शिकंजे में ले लिया। इस परिवार की तीन सगी बहनों को उसने अनगिनत बार अपनी हवस का शिकार बनाया। सभी बहनें तब से उसका शिकार होती आ रही थीं जबसे वह नाबालिग थीं। इतना ही नहीं जब लड़कियां प्रेगनेंट हो जातीं थी, तो वह उनका अबॉर्शन कराता था। रेप का यह सिलसिला कई सालों से बादस्तूर जारी था। एक लड़की की उम्र 19 साल, दूसरी की 18 साल तीसरी की महज 13 साल है ओर वह कक्षा पांच की छात्रा है। 1 नौकरानी को उसने अपना शिकार बनाया। बड़े घर की महिलाओं पर भी उसकी नजरें होती थीं। कॉलेज छात्रा की शिकायत पर तांत्रिक मुंबई के जे.जे. मार्ग पुलिस की गिरफ्त में आ गया। पुलिस ने पाखंडी को रिमांड पर लेकर पूछताछ व उसकी निशानदेही पर छापेमारी की, तो पुलिस के भी रोंगटे खड़े हो गए। तांत्रिक अपनी जिंदगी बादशाहों की तरह जीता था। फ्लैट्स में अय्याशी का हर साज-ओ-सामान मौजूद था। वह लड़कियों को फ्लैट पर भी बुलाता था। उसके 4 फ्लैट थे। पुलिस ने उसके कब्जे से 85 लाख रूपये से ज्यादा नगदी व 50 लाख रूपये के सोने-चांदी के जेवरात बरामद किये। करोड़ों की यह अकूत दौलत उसके बाप-दादा की जागीर या उसके खून-पसीने की कमायी नहीं थी बल्कि उसने पाखंड के बल पर अंधविश्वास में डूबे अपने भक्तों से ही झटकी थी। फ्लैट से कई आपत्तिजनक सामग्री भी मिलीं। अफसोस देखिए!वैज्ञानिक युग में मनुष्य भले ही कितनी भी ऊंचाईयों पर क्यों न पहुंच गया हो, लेकिन समाज में न तो तंत्र-मंत्र के नाम पर ढोंग करने वालों की कमी है और न ही अंधविश्वासियों की। आदिकाल से ही देश में तंत्रक्रिया पर भरोसा करने वाले लोग बहुतायत में हैं। लाखों लोग आज भी अंधविश्वास के सहारे ही जी रहे हैं। तांत्रिकों का धंधा भी खूब फलफूल रहा है।

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