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सोमवार, अगस्त 23, 2010

दागदार नेताओं का ‘गन’ तंत्र’
यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का ‘गन’ तंत्र है। राजनीति का आरामदायक महल। जो कदम जेल की दहलीज पर होने चाहिए वह लोकसभा व राज्यसभा में चहलकदमी करते हैं। जिन हाथों में जंजीरें होनी चाहिए वह जनसेवक बनकर जनता की तकदीर लिख रहे हैं। उनका अच्छा-बुरा हर कदम कानून व संगीनों के साये में महफूज है। देशी-विदेशी हथियारों से उन्हें बेपनाह मोहब्बत है। कड़वी हकीकत ही सही, लेकिन देश की दागदार व पाक-साफ होती जा रही खादी की सुरक्षा का खर्च 100 करोड़ से भी ज्यादा है। राजनीति में दबंग माफिया, अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह, बाहुबली, हिस्ट्रीशीटर, रासुकाधारी व छुटभैये अपराधी भी हैं। उनके खाते में लूट, हत्या, डकैती, बलात्कार जैसे जघन्य अपराध भी दर्ज हैं। सत्ता सबको चाहिए-कैसे भी, किसी भी कीमत पर। मतदान का आगाज व अंत हिंसक होता है। चुनाव आयोग के पसीने भी छूट जाते हैं। चुनावी लाभ के लालच में राजनीति का अपराधीकरण परपंरा बना, परन्तु देश के लिये चुनौती ओर गंभीर समस्या बन गया। डंके की चोट पर कह सकते हैं कि हथकंडों के बीच अपराध, अपराधियों, भ्रष्टाचार और राजनीति में चोली-दामन का साथ है। पंद्रहवी लोकसभा में करोड़पतियों का बोलबाला है। आपराधिक पृष्ठीभूमि वाले इतने सांसद कभी लोकसभा नहीं पहुंचे। बाहुबल और आपराधिक चरित्र का प्रताप लगातार बढ़ रहा है। इस परंपरा का टूटना उतना ही मुश्किल नजर आता है जितना सरकारी योजनाओं का असल गरीबों तक पहुंचना। राजनीति का अपराध्ीकरण अचानक नहीं हुआ। कोई एक दल अपराध की दुनिया वाले सपफेदपोश बाजीगरों को बाहर का रास्ता दिखाता है, तो दूसरा उसका दिली तौर पर स्वागत करता है और......