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रविवार, मई 09, 2010

जल्लाद भी खुश हो गया आतंकी कसाब की फांसी से
*आतंकी पर अब तक 36 करोड़ खर्च हुए, *राक्षस को जिंदा रहने का मिलेगा सालों मौका, *1 अरब से ज्यादा हो सकता है दुष्ट पर खर्चा, *जल्लाद बोला सरेआम होनी चाहिए फांसी
166 बेगुनाह लोगों की मौत व 350 को घायल करने का षडयंत्रकारी आरोपी खूंखार आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को फांसी होने से केवल वही लोग खुश नहीं है जिन्हें उसने कभी न भरने वाले जख्म दिये हैं बल्कि उसे फांसी देने के इंतजार में बैठा देश का इकलौता जल्लाद भी खुश है। उसकी दिली ख्वाहिश है कि वह जालिम दहशतगर्द को बहुत जल्द फांसी पर लटकाकर कुछ सेकेण्ड में ही उसकी सांसों की डोर को तोड़ दे, लेकिन अफसोस! भारत में ऐसी व्यवस्था आतंकवादियों के लिये नहीं है। देश के 70 फीसदी से भी ज्यादा लोग पाकिस्तानी राक्षस या यूं कहंे आतंकवाद की हांडी के सड़े हुए ‘एक चावल’ कसाब को नाम व शक्ल से जानते हैं। इसे विशेष अदालज के माननीय न्यायाधीश एम.एल. तहलियानी देश को आर्थिक चोट हमले से भी मिली ओर कसाब से भी। क्योंकि इस कसाब पर अब तक सरकार के 36 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं। उसे सुविधाओं के बीच जिंदा रखना मजबूरी जरूर है, लेकिन यह भी सच है कि देश के लाखों लोगों को प्रतिदिन दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती। इतनी रकम से बहुत गरीबों का भला हो सकता था। फांसी की सजा के बाद अभी तो उसे पालना भी पड़ेगा। यह खर्च भी करोड़ों में ही होगा। यह अरब में भी पहुंच जाये, तो ताज्जुब नहीं होगा, क्योंकि भारत की कानूनी व्यवस्था ही ऐसी है। यह खर्च पाकिस्तान नहीं देगा बल्कि भारत की जनता की जेब से ही होगा।  सच तो ये है कि अब कभी न खत्म होने वाला इंतजार चलेगा...

1 टिप्पणी:

perdeep ने कहा…

sachai yahi hai.