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सोमवार, अप्रैल 26, 2010

शिमला की वादियों में हुआ क्रूर कत्ल
आईआईटी रूड़की का छात्रा गौरव वर्मा व आईआईटी दिल्ली की टैक्सटाईल इंजीनियरिंग की छात्रा प्रगति टिब्बरवाल एक-दूसरे को प्यार करते थे। उनका प्यार कुछ ऐसे परवान चढ़ा कि आजादी का लाभ उठाकर दोनों के मर्यादाओं को लांघ दिया। गौरव ने अपना जन्म दिन शिमला जाकर मनाना चाहा, तो प्रेमी की खुशी के लिये प्रगति तैयार हो गई। रसिक होटल के रूम नंबर-26 में दोनों ने केक काटकर व शराब पीकर जन्म दिन का जश्न मनाया। दोनों शादी करना चाहते थे। अतीत के सच्चाई जानने के दौर में गौरव के सामने तीसरे का जिक्र आया, तो उसके दिल में नपफरत ने जन्म ले लिया ओर वह प्रगति के चरित्र पर शक कर बैठा। उसने प्रगति को सबक सिखाने का पफैंसला किया ओर बीयर की बोतल से सिर में प्रहार कर व जन्म दिन का केक काटने वाले चाकू से ही काटकर प्रगति की हत्या कर दी। (सत्यकथा के मई,2010 अंक में प्रकाशित कहानी के कुछ अंश) -मौसम चाहे जो भी शिमला का वातावरण हमेशा दिल को लुभावने वाला ही रहता है। प्राकृतिक सौंदर्य का हर रंग आँखों को लुभावना लगता है। फुरसत व जिंदगी के कई लम्हों को यादगार बनाने आने वाले लोगों का शिमला में तांता लगा रहता है। सैलानियों व शिमला का जैसे जन्म-जन्मांतर का नाता है। शिमला में शांत वातावरण व सामाजिक व्यवस्था का ऐसा असर है कि छिटपुट घटनाओं को यदि छोड़ दिया जाये, तो यहां अपराध कम ही घटित होते हैं। यह स्थिति कानून व समाज दोनों के लिये ही अच्छी कही जा सकती है, लेकिन शनिवार 27 फरवरी,2010 की सुबह का आगाज जितना शांत व खूबसूरत हुआ था दोपहर होते-होते वह उतना ही सनसनीखेज हो गया। क्या पुलिस क्या मीडिया सभी विक्ट्री टनल, मॉल रोड के नजदीक स्थित होटल रसिक की तरफ दौड़ पड़े थे।  सूचना पाकर बालूगंज थाना प्रभारी गुरदीप सिंह मय पुलिस बल के होटल पहुंचे गए थे। बेड पर एक युवती की खून से लथपथ लाश पड़ी हुई थी ओर उसके बदन से कपड़े नदारद थे।  पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वहां से एक लैपटॉप, पैन ड्राइव, शराब व बीयर की खाली बोलत, चाकू, पर्स से सौन्दर्य प्रशासन, एटीएम कार्ड व कपड़े आदि समान बरामद हुआ। इस सबके बीच खास बात यह थी कि एक छोटा केक भी टेबल पर रखा हुआ था। जिसमें से टुकड़ा कटा हुआ था और.......
बंदूक वाले मास्टर जी
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में नरभक्षी गुलदारों, तेंदूओं ओर बाघों का आतंक कोई नई बात नहीं है। बच्चों व बड़ों को वह अपना शिकार बनाते रहते हैं। लखपत सिंह रावत पेशे से शिक्षक थे। उन्हें सपनों में भी बच्चों की चीखें सुनायी देती थीं। वर्ष 2000 में उत्तराखंड का चमोली जिला नरभक्षी गुलदार से आतंकित हुआ, तो बड़े-बड़े शिकारी आये, लेकिन नरभक्षी इतना चालाक हो गया कि दो साल तक वह मारा नहीं जा सका। वह 12 बच्चों का अपना निवाला बना चुका था। तब लखपत सिंह ने सरकार से जिद करके नरभक्षी को मारने का परमिट लेकर कलम थामने वाले हाथ में बंदूक ली और उसे मार गिराया। इस शिक्षक ने मौत से सामना करने के लिये बंदूक थामी तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक यह शिक्षक उत्तराखंड के चमोली, टिहरी, पौड़ी, चंपावत, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी व देहरादून आदि जिलों में दर्जनों नरभक्षियों को मार चुका है। उन्होंने नरभक्षियों पर शोध भी किया। उनके असामान्य व्यवहार के कारणों को जाना ओर लोगों को बचाव के उपाय भी बताये। लखपत सिंह को आज लोग बंदूक वाले मास्टर के नाम से जानते हैं। (पूर्ण कहानी मनोहर कहानियाँ के अप्रैल,2010 अंक में प्रकाशित) जंगल के शानदार जानवरों को मारकर वह अफसोस भी जाहिर करते हैं ओर उसके नरभक्षी बनने के मुकाम के पीछे इंसान को ही जिम्मेदार बताते हैं।.......

रविवार, अप्रैल 18, 2010

खाप पंचायत ने पति-पत्नी को भी बना दिया भाई-बहन
दुनिया की तमाम हलचल से बेखबर दस महीने का मासूम रौनक गहरी नींद के आगोश में था। इसके विपरीत कविता के मन में तूपफान उठ रहा था। एक ऐसा तूफान जो शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। वह ऐसे भंवर में उलझी हुई थी जिससे वह निकलना चाहती थी। यह भंवर था वक्त और उसकी जिंदगी। सुहागन होकर भी वह खुद को विधवा महसूस कर रही थी। उसके दिल-ओ-दिमाग पर शादी से लेकर खाप पंचायत के फैसले की यादें रह-रहकर ताजा हो रहीं थीं। नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी। कभी वह रौनक को देखती तो कभी शून्य को निहारने लगती। यह सिलसिला घंटों चलता रहा। वह खुद को दुनिया की सबसे बदनसीब विवाहिता समझ रही थी। सामाजिक व्यवस्था, पुरातन मान्यता व गोत्रा विवाद ने उसे ऐसा झटका दिया कि जिस पति के साथ वह ढाई साल से सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रही थी उसी पति के साथ उसका रिश्ता भाई-बहन का बना दिया गया। जो सतीश कल तक रौनक का पिता था वह मामा बन गया। पंचायत का फरमान भले ही तुगलकी ओर दिलों को कभी न भरने वाले जख्म देने वाला था, लेकिन सामाजिक बहिष्कार के डर से उसे मानना सभी की मजबूरी थी। कविता के पति को भी सजा का दंश झेलना पड़ा था। उसे न सिर्फ गांव से निकाल दिया गया था बल्कि चल-अचल संपत्ति से भी बेदखल कर दिया गया था। सरेआम हुए अपमान ने कविता को झुलसा कर रख दिया। 30 जनवरी की रात कविता को पूरी रात नींद नहीं आ सकी। सुबह का आगाज सुखद माना जाता है, लेकिन कविता तो जैसे जिंदा लाश बन चुकी थी। उसका चेहरा भावहीन था और उदासी के बादल भी मंडरा रहे थे। फैंसला देने वाले समाज के कथित ठेकेदार कह रहे थे कि उन्होंने इंसाफ कर दिया। कविता आखिर ऐसे हालात से कैसे रू-ब-रू हुई इसके पीछे भी एक वजह थी....(सत्यकथा अप्रैल,2010 अंक में प्रकाशित)

शनिवार, अप्रैल 17, 2010

बाबा इच्छाधारी देह का व्यापारी
शिवमूर्त द्विवेदी खुद को साईं भक्त बताता था। उसने अपना नाम रखा था इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूट वाले। उसके सैंकड़ों भक्त थे, लेकिन साईं भक्ति व भगवा चोले की आड़ में वह देश का सबसे बड़ा सैक्स रैकेट चला रहा था। इच्छाधारी इस बाबा का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। उसके रैकेट में 500 से ज्यादा स्कूली छात्राओं, मॉडल्स, छोटे पर्दे की कलाकारों, एयर होस्टेस से लेकर घरेलू महिलाएं तक थीं। र्ध्म की आड़ में वह करोड़ों की सम्पत्ति का वारिस बन गया। दूसरों को धर्म व नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाला खुद अनैतिकता में लिप्त था। कई नेताओं, पुलिस अधिकारियों व करोड़पतियों से उसके संबंध रहे। इच्छाधारी की जब पोल खुली तो दिल्ली पुलिस के अलावा उसके भक्त भी चौंक गए। वह आपराधिक पृष्ठभूमि का भी स्वामी था। (सम्पूर्ण कहानी मनोहर कहानियाँ के अप्रैल,2010 अंक में) कुछ हिस्सा... शॉम ढलने के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली की रंगीनियां भी बढ़ जाती हैं। शॉपिंग माल्स, होटलों व सड़कों पर लंबी चमचमाती कारों का कापिफला भी सड़कों के सीने पर दौड़ता हुआ नजर आने लगता है। एक करोड़ की आबादी वाली राजधानी में सड़क चलते लोग एक-दूसरे को कम ही जानते हैं। व्यस्त जीवन शैली में दिन की थकान उतारने के लोगों के अपने-अपने तरीके हैं। कोई शॉपिंग करता है, कोई फिल्म देखने जाता है, कोई घूमना पसंद करता है तो कोई सीधे बिस्तर का रूख करके नींद के आगोश में चला जाता है। दक्षिणी दिल्ली स्थित पीसीआर मॉल हर रात की तरह 25 पफरवरी,2010 की रात भी रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया हुआ था। मॉल के अंदर और बाहर लोगों की खासी भीड़ थी। एक से एक महंगी कारें वहां कतारबद्व खड़ी हुईं थीं। कारों ओर लोगों की इसी भीड़ के बीच एक सिल्वर कलर की होंडा स्विक कार भी वहां आकर रूकी। इस कार का नंबर था-डीएल-4सीएए-0300। कार की चमक ओर उसके नंबर को देखकर ही पता चल रहा था कि उसमें कोई ऊँचें रसूख वाला शख्स सवार था। कार के रूकते ही उसकी बायीं सीट से एक शख्स नीचे उतरा। लंबी-चौड़ी कदकाठी के वारिस जींस व टीशर्ट पहने उस शख्स के चेहरे पर डाढी व मूंछ होने के साथ ही लंबे बाल भी थे। इन बालों को उसने फैशनेबल अंदाज में पीछे करके रबड़ बैंड लगाया हुआ था। उसके चेहरे पर अनोखा तेज था। उसके सिर से लेकर नख तक रईसी की झलक थी। उसके हाथों में सोने की अंगूठियों के अलावा एक कलायी पर बेशकीमती रिस्टवॉच व दूसरी कलायी पर सोने का ब्रेसलेट था जबकि गले में मोटी गोल्डन चेन थी.....

शनिवार, अप्रैल 03, 2010

सानिया+शोएब: सरहदों ओर सवालों में उलझा रिश्ता
सानिया मिर्जा व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक का गुपचुप ढंग से पनपा रिश्ता किसी मुकाम पर पहुंचने से पहले ही सवालों ओर विवादों के चक्रव्यूह में उलझ चुका है। दोनों ही चर्चित हैं ओर कई कारणों से विवादित भी रह चुकेे हैं। सरहदों ने भी इस रिश्ते को उलझन में डाल दिया है। दो देशों के झुलसते रिश्तों के बीच मोहब्बत का तराना गुनगुनाने का दावा करने वाले सानिया-शोएब पर तिरछी नजरें हैं। क्योंकि इसकी गुंजाइश कम है कि इससे मुल्कों के रिश्तों में तल्खी फनां होकर मिठास पैदा होगी या पुराने जख्मों के निशां मिट जायेंगे, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री नवाज व पाक रेंजर डीजी मो. याकूब इसकी उम्मीद जता रहे हैं। निकाह के बाद सानिया दुबई में बसने की घोषणा कर चुकी है। हैदराबाद की ही शोएब की पूर्व कथित पत्नी आयसा सिद्दीकी इस वक्त सबसे बड़ी खलनायक बनकर उभरी हैं ओर लगातार गंभीर आरोप लगा रही हैं। शोएब के खिलाफ बंजारा हिल्स थाने में धारा-240,498 व 206 के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करा दिया गया है जिनमें गिरफ्तारी संभव है। बेटी को इंसाफ दिलाने के लिये एम.ए. मलिक भी मैदान में हैं। शोएब से निकाह के सुबूत के तौर पर निकाहनामा उसने पेश कर दिया है। दूल्हे के कॉलम मे शोएब के हस्ताक्षर भी हैं। दावे के तौर पर आयशा व शोएब का निकाह 2002 में हुआ। निकाह साबित करने के पर्याप्त सुबूतों की मौजूदगी का दावा है। शोएब के बहनोई इमरान जफर मलिक निकाहनामें को फर्जी करार दे रहे हैं। यह बात अलग है कि शोएब का पूरा परिवार आयशा को जानता है ओर पूर्व में शोएब ने आयशा से शादी की बात स्वीकार की थी। शोएब भी पाकिस्तान की तरह झूठ का पुलिंदा निकले। परन्तु आखिर में उन्होंने हार मानी ली ओर निकाह की सच्चाई पर मोहर लगा दी। फतवों को लेकर चर्चित देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था दारूल उलूम देवबंद ने भी साफ कर दिया है कि सानिया को अपना जीवनसाथी चुनने का लोकतांत्रिक दृष्टि से पूरा अधिकार है। यदि शोएब ने दूसरी शादी की हुई है, तो बाकायदा शरई मान्यताओं को पूरा करने के बाद ही वह शादी कर सकते हैं। भड़काऊ भाषण देने में माहिर शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी सानिया को निशाने पर लिया है। बकौल ठाकरे-‘सानिय अब भारतीय नागरिक नहीं रह गईं हैं। यदि सानिया वास्तव में दिल से भारतीय होतीं, तो उनका दिल किसी पाकिस्तानी के लिये नहीं धड़कता।’ सानिया के करियर पर भी कटाक्ष हुआ-‘टेनिस कोर्ट पर जीत की अपेक्षा वह चुस्त कपड़ों, फैशन ओर प्रेम प्रसंगों की वजह से ज्यादा चर्चा में रही हैं।’ कहने वाले कहते हैं कि 100 करोड़ की आबादी वाले देश में कोई कुंवारा लड़का नहीं बचा जो सानिया ने पाकिस्तान का रूख किया। इस कदम को भारतीयों के लिये भी शर्मनाक व जज्बातों पर चोट करने वाला बताया जा रहा है। राष्ट्रगान के अपमान के अदालत में चल रहे चार मुकदमों की वारिस सानिया पर सिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे सादिक की टिप्पणी है कि सानिया को हिन्दुस्तान के सत्रह करोड़ मुसलमानों में से कोई ऐसा मुसलमान नहीं मिला जिससे वह निकाह कर सके। उन्होंने सानिया की देशभक्ति पर भी सवाल उठाया है। वैसे दहशतगर्दी व आतंकवाद की भयानक तस्वीर वाले पाकिस्तान को लेकर सानिया ने अपने करियर में कभी कोई अल्फाज नहीं बोला। इस्लाम के ठेकेदारों के निशाने पर सानिया तब आयीं थीं जब उनके स्कर्ट पहनने पर टिप्पणियां हईं। सानिया ने यह कहकर बोलती बंद कर दी कि उलेमा स्कर्ट नहीं खेल देखें। 32 एमबी के एक कथित एमएमएस ने भी सानिया को दुख पहुचंाने का काम किया। ग्रामीण क्षेत्र में प्रेम क्राड़ा वाले इस एमएमएस में कितनी सच्चाई इस हकीकत को कोई भी नहीं जानता। वैसे एमएमएस के आने के बाद वह काफी समय तक टेनिस कोर्ट में नहीं दिखीं थीं। इंटरनेट पर लोग अब भी इस एमएमएस को देखते हैं। सानिया ने अपने बचपन के दोस्त शोहराब से ऐसी दोस्ती निभायी कि जितने आलीशान ढंग से 10 जुलाई,2009 को सगाई हुई थी उतनी ही बेदर्दी से टूट भी गई।