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शनिवार, मार्च 13, 2010

जम्मू-कश्मीर का अमीना-रजनीश प्रकरण
मोहब्बत का अधूरा सफर
-नितिन सबरंगी
प्राकृतिक सौन्दर्य की गोद में बसे श्रीनगर की अमीना मराजी व जम्मू के राजेश उर्फ रजनीश शर्मा में प्यार हुआ, तो उन्होंने साथ जीने-मरने की कसमें खायीं। आग के दरिया में तैरकर दोनों ने मजहब की दिवारे गिराकर शादी भी कर ली। अमीना धर्म बदलकर आंचल शर्मा हो गई। इससे उसके परिजन दुश्मन बन गए। दोनों के जीवन में खुशियां शायद एक महीने की ही मेहमान थी। पुलिस ने राजेश को हिरासत में लिया, तो उसकी लाश हवालात में लटकी पायी गई। आंचल पर जैसे मुसीबतों को पहाड़ टूट पड़ा। सुर्खियों में आये इस मामले ने जम्मू-कश्मीर में हड़कम्प मचा दिया। गमजदा आंचल को इंसाफ दिलाने के लिये धर्मिक संगठन भी मैदान में उतर आये। आंचल ने हत्या का आरोप लगाकर अपने परिजनों व पुलिस के खिलाफ जंग शुरू कर दी, लेकिन अचानक एक दिन वह घर से लापता हो गई। अगले दिन जब मिली तो फिर से अमीना बन चुकी थी। अमीना की किस्मत ने जो खेल उसके साथ खेला उसमें वह खुद उलझकर रह गई। राजेश यदि इस दुनिया में होता, तो अमीना शायद ही मोहब्बत में दगा करती। (प्रकाशित मनोहर कहानियाँ मार्च,2010 अंक में) *- सर्दी हो या गर्मी लोगों दिनचर्या सुबह ही शुरू हो जाती है। जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। 15 जनवरी,2010 की सर्द सुबह का आगाज भी कड़ाके की ठंड के साथ ही हुआ। जम्मू शहर के बसीनगर थानांतर्गत रोड़े की छपरी इलाके में रहने वाली श्रीमती राजकुमारी अलसाते हुए सोकर उठ गईं। प्रतिदिन की तरह आदतन वह अपनी बहू आंचल को जागने के लिये उसके कमरे की तरफ बढ़ गईं। उसके कमरे का दरवाजा अधखुला था..ओर.....पूर्ण स्टोरी के लिये मेल -nitinsabrangi@gmail.com

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