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सोमवार, मार्च 15, 2010

इश्क के जुनून में खानम का खून
-नितिन सबरंगी
जरायम को लेकर भी बदनाम हो रहे उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में प्रतिदिन की भांति उस दिन भी लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। बस अड्डों पर आमतौर पर मुसाफिरों की भीड़ जमा रहती है। सोहराब गेट बस अड्डे पर भी दोपहर के वक्त सैंकड़ों मुसाफिर मौजूद थे। खुर्जा-बुलन्दशहर को जाने वाली रोडवेज बस आकर खड़ी हो गई। इस बस का नंबर था यूपी 15 एटी-1593। बस के रूकते ही एक-एक कर उसमें दर्जनों लोग सवार हो गए। खूबसूरत दिखने वाली एक दुबली-पतली युवती भी बस की तरफ बढ़ी। युवती नीले रंग की जींस ओर छींटदार कुर्ता पहने हुए थी। यह लिबास उस पर खूब फब रहा था। एक तो खूबसूरती दूसरे उसका लिबास ये दोनों ही चीजे ऐसी थीं जो यात्रियों का ध्यान उसकी तरफ खींच रहीं थीं। युवती के कंधे पर पर्स झूल रहा था। वह युवती अकेली नहीं थी उसके साथ अधेड़ महिला भी थी। पहली ही नजर में देखकर लग रहा था कि दोनों के बीच कोई बेहद नजदीकी रिश्ता था। बस तैयार खड़ी थी। वह दोनों भी उसी बस में सवार हो गईं। उनके चढ़ते ही परिचालक ने सरसरी सी नजरें डालकर पूछा,‘‘कहां जाना है आपको?’’‘‘भैया बस गुलावठी तो जायेगी ना?’’ युवती के जवाब में सवाल भी था। उसकी आवाज बेहद मधुर थी। परिचालक ने जल्दी से जवाब दिया,‘‘हां-हां जायेगी आप उध्र बैठ जाइये।’’ उसने चालक के पीछे वाली खाली पड़ी सीट की तरफ इशारा करते हुए कहा। युवती खिड़की से सटकर बैठ गई जबकि उसके साथ वाली महिला उसके बराबर में बैठ गई। बस में चूंकि यात्रियों की संख्या अभी कम थी इसलिए चालक यात्रियों को इंतजार करने लगा अलबत्ता उसने बस को स्टार्ट करके छोड़ दिया। इसी बीच उस युवती का मोबाइल बज उठा। उसने एक नजर स्क्रीन पर उभरे नंबर पर डाली फिर जल्दी से मोबाइल कान से लगाकर बोली,‘‘हैलो।’’ दूसरी तरफ न जाने कौन था, लेकिन युवती ने फोनकर्ता को बताया,‘‘मैं अभी बस अड्डे पर हूं।’’ इतना बताने के साथ ही उसने फोन काटा ओर उसे पर्स के हवाले कर दिया। कुछ मिनट यूं ही बीत गए। यही वह वक्त था जब एक युवक टहलता हुआ वहां आया। उसके चेहरे पर हल्की घबराहट थी ओर वह चौकन्नी नजरों से सवारियों को देख रहा था। सम्भवतः उसे किसी की तलाश थी। अचानक युवक की नजरें खिड़की के पास बैठी उस युवती पर जाकर ठहर गईं। वह तेजी से खिड़की के पास पहुंच गया अचानक उसकी आँखों में नफरत उभर आयी। वह युवती को खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए.....(मनोहर कहानियाँ, दिसम्बर,09 अंक में प्रकाशित) पूर्ण कहानी के लिये mailto:मेल-nitinsabrangi@gmail.com

1 टिप्पणी:

Naushad A. Ansari ने कहा…

Very Good Dost.....

Keep it up....

(Lage Raho Munna Bhai)