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मंगलवार, जनवरी 05, 2010


अब आए ऊंट पहाड़ के नीचे..........
पुरानी कहावत सामने आ रही है. दो ऊंट या सम्मानजनक सब्दों में अपनी दुनिया के बेताज नहीं "ताज वाले बादशाह" रुचिका कांड के आरोपी राठोर और लाखो लोगों की आस्था का किला बने संत आशाराम बापू गिरफ़्तारी से बचने के लिये घूम रहे है. मोह माया से लगाव न रखने वाले करोरों के स्वामी आशाराम बापू को एक मामले में अग्रिम जमानत देने से कोर्ट ने इंकार कर दीया है. उनकी गिरफ़्तारी का रास्ता बिलकुल साफ़ है. बाबा भगवान की सरन में है. इसी तरह वर्दी वाले गुंडे रुचिका कांड के आरोपी राठोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर अब उनकी गिरफ़्तारी भी हो सकती है. उम्मीद है जनाब को अब कोर्ट के बाहर हंसी नहीं आयगी. देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री में आरुषी के पिता तलवार उनकी पत्नी नुपुर तलवार एक बार फिर सी. बी. आई के निशाने पर है. आरुषी कांड यकीनन देश का अनोखा बड़ा केश है जीसने अपराध के बड़े बड़े जानकारों के दीमाग को हिलाकर रख दिया है. वह साजिश का इतना बड़ा सरताज है जो लाखों दीमाग से आगे की सोच रखता है. उसका रसूख भी है, दो़लत के बल पर वह किसी से भी जमीर को खरीदने की ताकत रखता है. अरुषी के खून का कारण भी कई राजों का राजदार है. सीबीआई अब फिर जाच करेगी. सवाल यही है क्या कोई साजिश का सरताज बेनकाब होगा? अब देखते है क्या होता है.

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